Rain GST का नया खेल! “बारिश में डिलीवरी या जेब पर डकैती?” — ऑनलाइन फूड ऐप्स की मनमानी

Navchetana

 


नई दिल्ली। ऑनलाइन फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म्स एक बार फिर अतिरिक्त शुल्कों को लेकर लोगों के निशाने पर हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक बिल ने उपभोक्ताओं के बीच गुस्सा बढ़ा दिया है, जिसमें खाने की कीमत से अलग कई तरह के चार्ज जोड़े गए हैं — जैसे प्लेटफॉर्म फीस, पैकेजिंग फीस, रेन फीस और यहां तक कि “रेन फीस पर GST” भी।


उपभोक्ताओं का कहना है कि बारिश के नाम पर अलग शुल्क लेना और फिर उस पर टैक्स जोड़ना आम लोगों की मजबूरी का फायदा उठाने जैसा है। सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या इन शुल्कों पर कोई स्पष्ट सरकारी निगरानी है या कंपनियां अपनी मर्जी से नए-नए चार्ज जोड़ रही हैं।


सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने इसे “डिजिटल लूट” बताते हुए सरकार और उपभोक्ता संरक्षण एजेंसियों से हस्तक्षेप की मांग की है। लोगों का कहना है कि सुविधा के नाम पर ग्राहकों की जेब पर लगातार बोझ डाला जा रहा है, जबकि डिलीवरी चार्ज पहले से ही वसूला जाता है।



विशेषज्ञों का मानना है कि प्लेटफॉर्म्स को अपने शुल्कों में पारदर्शिता रखनी चाहिए। यदि किसी सेवा के लिए अतिरिक्त पैसा लिया जा रहा है, तो उसका स्पष्ट आधार और नियम उपभोक्ताओं को बताना जरूरी है।


अब बड़ा सवाल यही है —

क्या ऑनलाइन सुविधा के दौर में उपभोक्ता सिर्फ “छिपे हुए चार्ज” भरने के लिए रह गया है?



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