प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने श्री श्री हरिचंद ठाकुर को जयंती पर दी श्रद्धांजलि, कौन हैं मतुआ समुदाय?

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नई दिल्ली | 27 मार्च 2025 – प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज श्री श्री हरिचंद ठाकुर की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने ठाकुर जी के समाज सुधारक कार्यों की सराहना करते हुए उनके योगदान को याद किया।


प्रधानमंत्री ने ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा:
"श्री श्री हरिचंद ठाकुर जी को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि। सेवा और आध्यात्म पर उनके बल ने अनगिनत लोगों के हृदय में उन्हें अमर बना दिया है। उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन हाशिए पर खड़े लोगों के उत्थान और समानता, करुणा एवं न्याय के प्रचार में समर्पित कर दिया। मैं कभी नहीं भूल सकता जब मैंने पश्चिम बंगाल के ठाकुरनगर और बांग्लादेश के ओराकांडी में उनके चरणों में श्रद्धांजलि अर्पित की थी।"



प्रधानमंत्री मोदी ने मतुआ धर्म महामेला 2025 के सफल आयोजन की शुभकामनाएँ भी दीं। उन्होंने कहा कि यह आयोजन मतुआ समुदाय की समृद्ध संस्कृति को प्रदर्शित करेगा। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि सरकार ने मतुआ समुदाय के कल्याण के लिए कई योजनाएँ शुरू की हैं और आने वाले समय में भी यह प्रयास जारी रहेंगे।


प्रधानमंत्री ने अपने संदेश के अंत में ‘जय हरिबोल’ का उद्घोष भी किया, जो मतुआ समुदाय के श्रद्धालुओं के बीच लोकप्रिय है।


मतुआ समुदाय का योगदान

श्री श्री हरिचंद ठाकुर ने 19वीं शताब्दी में मतुआ धर्म की स्थापना की थी। उनका उद्देश्य समाज में समानता और सामाजिक न्याय को बढ़ावा देना था। उनके विचार और शिक्षाएँ आज भी लाखों अनुयायियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी हुई हैं।


कौन हैं मतुआ समुदाय?

मतुआ समुदाय बंगाली हिंदुओं का एक वंचित/दलित वर्ग है, जो बंगाल के अनुसूचित जाति समूह का हिस्सा है। यह समुदाय मूल रूप से पूर्वी बंगाल (वर्तमान बांग्लादेश) से आया है।


1971 के युद्ध (जिसके परिणामस्वरूप बांग्लादेश अस्तित्व में आया) से पूर्व तथा उसके पश्चात् मतुआ समुदाय के लाखों लोगों ने धार्मिक उत्पीड़न से परेशान होकर भारत में प्रवास किया। पश्चिम बंगाल में अनुसूचित जाति की कुल आबादी में नामशूद्र (मतुआ) समुदाय की हिस्सेदारी 17.4% है और उत्तर बंगाल में राजबंशियों के बाद यह दूसरा सबसे बड़ा समूह है।


इस समुदाय के नेता श्री श्री हरिचंद ठाकुर को मतुआ महासंघ (Matua Mahasangha) का संस्थापक माना जाता है, जो मतुआ समुदाय का प्रतिनिधित्व करता है। उन्होंने जाति आधारित उत्पीड़न का विरोध किया तथा दलितों की शिक्षा और सामाजिक उत्थान की दिशा में कार्य किया। उनकी विचारधारा समानता और सामाजिक न्याय को बढ़ावा देती है।


मतुआ समुदाय और नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA)

पश्चिम बंगाल का मतुआ समुदाय नागरिकता संशोधन अधिनियम (Citizenship Amendment Act- CAA), 2019 के कार्यान्वयन की मांग कर रहा है।


मटुआ समुदाय के लाखों लोग अब भी भारतीय नागरिकता की आधिकारिक मान्यता की प्रतीक्षा कर रहे हैं। नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) 2019 के तहत, पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई शरणार्थियों को नागरिकता देने का प्रावधान किया गया था।


हालांकि, पश्चिम बंगाल में CAA को लेकर राजनीतिक विवाद भी जारी है। राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने CAA को ‘विभाजनकारी नीति’ बताया है, जबकि केंद्र सरकार का कहना है कि इससे शरणार्थियों को सम्मानजनक पहचान मिलेगी।


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