नई दिल्ली – लोकतांत्रिक अध्यापक मंच दिल्ली ने आज दिल्ली के शिक्षा मंत्री श्री आशीष सूद को एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें शिक्षा प्रणाली में सुधार के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव और सिफारिशें प्रस्तुत की गईं। मंच ने नवनिर्वाचित सरकार को बधाई देते हुए शिक्षा के क्षेत्र में बदलाव के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
शिक्षा व्यवस्था में बदलाव की मांग
मंच द्वारा दिए गए ज्ञापन में शिक्षा के राजनीतिकरण को रोकने, विद्यालयों में समय पर संसाधन उपलब्ध कराने, और समग्र शिक्षा को बढ़ावा देने जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया गया। मंच ने पाठ्यक्रम की समीक्षा की जरूरत बताते हुए ईएमसी, देशभक्ति और हैप्पीनेस जैसे कार्यक्रमों को बंद करने की मांग की, क्योंकि उनका असर मुख्य विषयों की पढ़ाई पर पड़ रहा है।
अन्य मांगों में नैतिक शिक्षा को नई शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप महत्व देने, शिक्षक प्रशिक्षण को प्रभावी बनाने, छात्रों के लिए सार्थक अवकाश तय करने, विद्यालयों में पुस्तकालय निधि का समय पर वितरण, प्रशासनिक सहयोग बढ़ाने और एनजीओ की भागीदारी को सीमित करने की बातें शामिल हैं।
शिक्षक कल्याण के लिए भी उठाई आवाज
मंच ने शिक्षकों की सुरक्षा और गरिमा की बहाली को प्राथमिकता देने की मांग की। साथ ही, उन्होंने टैबलेट बजट प्रतिपूर्ति, एचआरए में वृद्धि को 2004 से लागू कर एरियर भुगतान, महिला शिक्षकों के आकस्मिक अवकाश को 25 और पुरुषों के लिए 20 दिन करने, और एमएसीपी को अधिक लाभकारी बनाने पर जोर दिया। मंच ने राजकीय विद्यालय शिक्षक संघ के चुनाव जल्द करवाने की भी मांग की।
मंच ने सरकार से की कार्रवाई की अपील
लोकतांत्रिक अध्यापक मंच के अध्यक्ष श्री कृष्ण कुमार फौगाट ने कहा, "हम दिल्ली की शिक्षा प्रणाली को और बेहतर बनाना चाहते हैं ताकि छात्रों और शिक्षकों को एक अनुकूल वातावरण मिल सके। हम चाहते हैं कि शिक्षा मंत्री इन सुझावों पर गंभीरता से विचार करें और आवश्यक कदम उठाएं।"
मंच के महासचिव श्री होशियार सिंह ने कहा कि वे शिक्षा विभाग के साथ मिलकर सुधारों को लागू करने के लिए तैयार हैं। मंच का मानना है कि इन सुझावों को लागू करने से दिल्ली की शिक्षा प्रणाली में सकारात्मक बदलाव आएंगे और छात्रों का भविष्य उज्ज्वल होगा।
ज्ञापन की एक प्रति शिक्षा निदेशक को भी भेजी गई है, ताकि जल्द से जल्द इन मुद्दों पर कार्यवाही हो सके।