स्कूलों में लखनऊ से नहीं पहुँची किताब लेकिन गुजरात से पहुँच गया तिरंगा

Sachin Samar
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जौनपुर। सरकार बुनियादी शिक्षा की नींव मजबूत करने के लिए अपना पेटारा खोल दिया है। प्राथमिक स्कूलों का कायाकल्प करा करकर सुंदर और स्वच्छ बनाया गया, बच्चो को आकर्षित करने के लिए ड्रेस, टाई -बेल्ट, जुता-मोजा मुहैया कराने के लिए उनके अभिभावको के खाते में ऑन लाइन पैसा भेज दिया है लेकिन छात्र-छात्राओं को किताबे न मिलने के कारण सरकार की मंशा पर पूरी तरह से पानी फिर रहा है। उधर बीएसए मीडिया को ही गुमराह करते हुए कहा कि तीन ट्रक किताबे आ गयी है, लेकिन जमीनी तहकीकात करने पर ढ़ोल में पोल मिला। 


अप्रैल माह से नया सत्र शुरू हो गया है, प्राथमिक स्कूलों में बच्चो की संख्या बढ़ाने के लिए बीएसए समेत सभी शिक्षक शिक्षिकाएं चिलचिलाती धुप में घर घर जाकर बच्चो और अभिभावको को जगरूक किया। टीचरो ने जो अपना खून पसीना बहाया उसका सार्थक परिणाम भी मिला। लेकिन इस सत्र की पढ़ाई शुरू हुए पांच माह बीत गया लेकिन अभी तक किताबे बच्चो को नही मिली। जब किताब ही नही मिलेगी तो बच्चे पढ़ेगें कैसे।  


जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी गोरखनाथ पटेल ने जानकारी देते हुए बताया कि 3 ट्रक  किताब आ चुकी है सत्यापन का काम किया जा रहा है 1 हफ्ते के अंदर सभी विद्यालय में किताबे पहुंच जाएंगे। इस बारे में जानकारी देते हुए जिला संगठन मंत्री प्राथमिक शिक्षक संघ के अश्विनी कुमार सिंह ने बताया कि 5 महीने बीत गए हैं लेकिन अभी तक किताबें मुहैया नहीं कराया गया हम लोग पुराने किताबों से बच्चों को पढ़ाने के लिए कटिबद्ध है उसी से बच्चों को पढ़ाया जा रहा है नई किताबें मिल गई होती तो और भी अच्छा होता।


एक तरफ जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी किताबें मिलने की दावा कर रहे हैं वही स्कूल के टीचरों का कहना है अभी तक बच्चों को कोई नई किताबें नहीं मिली है ,अब तक बच्चों को किताबें मिल जानी चाहिए। जब इस मामले की रियलिटी चेक किया गया तो कलेक्ट्रेट के महज 500 मीटर दूरी पर स्थित मियापुर कम्पोजिट विद्यालय के प्रभारी प्रधानाध्यापक ने बताया कि कक्षा सात की तीन किताबें मिली  है अन्य कक्षाओं की किताबें अभी तक नहीं मिला है हम लोग पुराने किताबों से ही बच्चों को पढ़ाई करा रहे हैं।

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