किताबों ने ही स्वप्नों और सोच के क्षितिज को विस्तार दिया..विमल । the matvala

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किताबें बचपन से ही मुझे आकर्षित करती रही हैं ... किताबों ने ही स्वप्नों और सोच के क्षितिज को विस्तार दिया... सबसे ज्यादा सुकून किताबों के साथ वक्त गुजार कर ही मिला..किताबें पढ़ने ,खरीदने ,आलमारी में सजाने ,लोगों को उपहार के रूप में देने, पुस्तक मेलों में भटकने का जुनून पागलपन की हद तक रहा है... और इस जुनून को पूरा करने में  सबसे ज्यादा सहयोग मिला  मेरे परिवार ,अध्यापकों और मित्रों से .. पापा  साइकिल की पिछली सीट पर दबाकर मेरे लिए  पत्रिकाएं और किताबे लाया करते थे ...आज भी  जब  कोई पत्रिका या किताब उन्हें उपयोगी जान पड़ती है  मेरे लिए संजोकर रखते हैं ..  जैसे  एक मां  अपनी बेटी के लिए गहने ...किताबों या पत्रिकाओं के लिए धन के आवंटन में घर से कोई पूछताछ नहीं होती थी ,एकमुश्त राशि जारी हो जाती थी..! 😊

इसके बाद सबसे ज्यादा सहयोग मिला अध्यापकों से जिन्होंने किताबों से दोस्ती करायी.. और अपनी किताबों के द्वार मेरे लिए खोल दिए और जब कभी बाहर जाते कोई अच्छी किताब मिलती तो मेरे लिए जरूर लाते हैं... कुछ लोग तो आज भी हाथ में पैसा पकड़ा कर मेरी मुट्ठी बाँध कर कहते हैं रख लो कुछ खा पी लेना  और किताबें खरीद लेना... ।
मित्रों का सहयोग तो अवर्णनीय  रहा है.. मित्र  सदैव मेरे लिए पुस्तकालय के समान रहे हैं ..स्कूल के ही दिनों से हम लोग उपहारों में किताबें दिया करते थे ... मित्रों ने तो किताबों के प्रति मेरे इश्क को जानकर  एक बड़ी धनराशि जो उनका जेब खर्च हुआ करती थी  उसको मेरे लिए खर्च कर दिया ..'मेरी निगाहों को पढ़ कर किताबों को खरीदता था वह'..!
पाठ्यक्रम के इतर पढ़ने के शौक की वजह से अकादमिक जीवन में कभी-कभी हानि भी हुई है.. 
            पर जीवन के दुर्गम रास्तों पर अंको से ज्यादा किताबों ने ही साथ दिया है ...!




मैं यहां अपनी कुछ पसंदीदा किताबें आपसे साझा कर रहा हूं ..जो पाठ्यक्रम के इतर हैं.. आप भी  अपनी पसंदीदा किताबें जरूर शेयर करें..कम से कम एक तो जरूर.. अधिकतम की कोई सीमा नहीं है..!और हाँ ये अंत नहीं आरंभ है...! 

सत्य के साथ मेरे प्रयोग, हिंद स्वराज - महात्मा गांधी 
भारत एक खोज-जवाहर लाल नेहरू
मुक्त भारत - गुरशरण दास, 
भारत गांधी के बाद - रामचंद्र गुहा 
जिलाधिकारी - आलोक रंजन
संस्कृति के चार अध्याय - दिनकर, 
भारतीय अर्थतंत्र -इतिहास एवं संस्कृति-अमर्त्य सेन
उभरते भारत की तस्वीर-नंदन नीलेकणि
भारतनामा - सुनील खिलनानी 
भारतीय समाज - श्यामाचरण दूबे 
आजादी आधी रात को - डोमिनिक लीपएर
द सीक्रेट - रान्डा बर्न 
माँ मैं कलेक्टर बन गया - राजेश पाटिल 
सुपर 30 - आनंद कुमार 
स्वराज - अरविंद केजरीवाल 

अति प्रभावकारी लोगों की सात आदतें - स्टीफन आर. कवी 

हरिवंश राय बच्चन,कुलदीप नैय्यर,खुशवंत सिंह,बेंजामिन फ्रैंकलिन, बराक ओबामा की आत्मकथा,

Man The Unknown - Dr. Alexis Carrel
A Passage to india - E.M.Foster
Macbeth- Shakespeare
Three mistakes of my life, Revolution2020- Chetan Bhagat
The Guide- R. K. Narayan
Wings of Fire, Turning points, My Dreams -Journey through challenges, Forge Your Future
-Abdul Kalam

लज्जा - तस्लीमा नसरीन, 
पाकिस्तान मेल - खुशवंत सिंह, 
मैला आँचल - फणीश्वर नाथ रेणु, 
गोदान, गबन, निर्मला -प्रेमचंद, 
दिव्या - यशपाल, 
महाभोज, आपका बंटी - मन्नू भण्डारी, 
सारा आकाश, आदमी की निगाह में औरत, एक दुनिया समानांतर- राजेंद्र यादव, 
कितने पाकिस्तान - कमलेश्वर, 
आषाढ़ का एक दिन , आधे-अधूरे - मोहन राकेश, 
अलग - अलग वैतरणी - शिव प्रसाद सिंह, 
काशी का अस्सी, रेहन पर रग्घू - काशी नाथ सिंह, 
राग दरबारी - श्रीलाल शुक्ल, 
आँगन में एक वृक्ष - दुष्यन्त कुमार, 
गुनाहों का देवता, सूरज का सातवां घोड़ा - धर्मवीर भारती, 
एक चादर मैली सी - राजेंद्र सिंह बेदी 
आनंद मठ - बंकिम चन्द्र चटर्जी, 
डार्क हार्स - नीलोत्पल मृणाल, 
चित्रलेखा-भगवती चरण वर्मा
अपने - अपने राम - भगवान सिंह, 
शेखर एक जीवनी - अज्ञेय 
जूठन - ओमप्रकाश वाल्मीकि, 
मुझे चाँद चाहिए- सुरेन्द्र वर्मा
बचपन खंभे लाल दीवारें - ऊषा प्रियंवदा 

आप इनमें से चुनाव कर सकते हैं, ये सब मुझे अच्छी लगी.. 

मोटिवेशन के लिए शिव खेड़ा, विजय अग्रवाल, जोगिंदर सिंह ,किरन बेदी  जैसे लेखकों को पढ़ सकते हैं ,आत्मविश्वास के लिए विवेकानंद तथा द्वंदों से बाहर निकलने के लिए और विचारों से टकराने के लिए ओशो और जे. कृष्णमूर्ति की किताबें सबसे अद्भुत हैं... साहित्य से सराबोर होने के लिए अंग्रेजी तथा हिंदी की कविताएं और उर्दू की गजलें तो हैं ही...!


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