हाईकोर्ट ने बीएचयू को फटकारा, विशेष कक्षा चलाओ फिर परीक्षा लो..

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इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने विशेष कक्षा चलाकर एलएलबी का  सेमेस्टर परीक्षा लेने का बीएचयू प्रशासन को दिया आदेश

रिट याचिका संख्या-40214/2018 शेखर कुमार सिंह व अन्य  बनाम भारत संघ व अन्य के  वाद में आज दिनांक-12/04/2019,शुक्रवार को माननीय इलाहाबाद उच्च न्यायालय के जस्टिस अजय भनोट की एकल पीठ ने काशी हिन्दू विश्वविद्यालय प्रशासन को विशेष कक्षा चलाकर नवंबर 2019 से पहले एलएलबी का सेमेस्टर परीक्षा लेने का आदेश दिया है।ज्ञात हो कि काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के विधि संकाय प्रशासन ने याचिकाकर्ता शेखर कुमार सिंह,प्रवीण सिंह और रुबीना खान समेत ऐसे सभी छात्रों को विगत ऑड सेमेस्टर का परीक्षा देने से नवंबर-दिसम्बर 2018 में वंचित कर दिया था जिनकी कक्षा में उपस्थिति 40% से कम थी।लेकिन छात्रों का आंदोलन के कारण 40% से ज्यादा उपस्थिति वाले सभी छात्रों को परीक्षा देने दे दिया गया जबकि नियमानुसार 70% से कम उपस्थिति वाले को परीक्षा देने नहीं दिया जा सकता।इसके विरुद्ध याचिकाकर्ता ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय में रिट याचिका दायर किया।

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने छात्रों के पक्ष में फैसला सुनाते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन को याचिककर्ता समेत कम उपस्थिति के कारण वंचित सभी छात्रों का विशेष कक्षा चलाकर नवम्बर 2019 से पहले  याचिकाकर्ता का एलएलबी पांचवीं और छठी सेमेस्टर का और अन्य छात्रों का वंचित किये गये संबंधित सेमेस्टर का परीक्षा लेने का आदेश दिया है।

न्यायालय ने नियम के विरुद्ध 70% से कम उपस्थिति वाले छात्रों को काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के विधि संकाय द्वारा  परीक्षा देने की अनुमति देने जबकि 40 % से कम उपस्थिति वाले छात्रों को वंचित करने के रवैये से नाराजगी जतायी।न्यायालय ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया द्वारा निर्धारित 450 कक्षा नहीं चलाये जाने के बावजूद कम उपस्थिति प्रतिशत के आधार पर छात्रों को परीक्षा से वंचित करने के विधि संकाय के निर्णय से नाराजगी जतायी।

गौरतलब है कि छात्रों के आंदोलन के बाद नवंबर-दिसम्बर 2018 में  एलएलबी ऑड सेमेस्टर की परीक्षा में 40 प्रतिशत से ज्यादा उपस्थिति वाले छात्रों को बैठने की अनुमति काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के विधि संकाय ने दे दिया लेकिन 40 प्रतिशत से कम उपस्थिति वाले  छात्रों को परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं दिया जबकि बार कौंसिल ऑफ इंडिया के नियमानुसार 70% से कम उपस्थिति वाले छात्रों को परीक्षा देने की अनुमति नहीं दी जा सकती।इस संबंध में छात्रों ने बीएचयू के कुलपति तक से मुलाकात की लेकिन कोई राहत नहीं मिलने पर  उच्च न्यायालय में रिट याचिका दायर की जिसपर यह फैसला आया है।

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