न टोली है न रंगों की झोली है, ये कैसी पढ़े लिखों की होली है ?

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बीएचयू । मालवीय चबूतरे पर रविवारी काव्य पाठ में आज "पढ़े लिखों की होली" पर पाठ हुआ, जिसमे दर्जन भर छात्रों ने भाग लिया । उसके बाद एक दूसरे को अबीर गुलाल लगाकर पकवान खिलाया । चबूतरा गुरु ने कहा पढ़े लिखों की होली में रंग गुलाल गायब है वो अब फगुवा खेलने के लिए घर से भी बाहर नही निकलते । महिलाएं मेकअप ख़राब होने के डर से होली का आनन्द नही ले पा रही हैं ।






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