भारत बन्द : तानाशाही फरमानों के खिलाफ निकाला आक्रोश मार्च, प्रस्तुत किये नुक्कड़ नाटक और गीत

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वाराणसी । 13 प्वॉइन्ट रोस्टर ,सुप्रीम कोर्ट द्वारा आदिवासियों को जल,जंगल,जमीन से बेदखल करने और आर्थिक आधार पर दिये गए आरक्षण के खिलाफ में भारत बंद के आह्वान पर आज बीएचयू और काशी विद्यापीठ के छात्रों एवं बनारस के न्याय पसंद लोगों द्वारा बीएचयू विश्वनाथ मंदिर से आक्रोश मार्च निकाल कर लंका गेट पर पहुँचे।लंका गेट पर पहुँचकर साथियों द्वारा सभी दुकानों को बंद करा के सभा किया गया।

इसके पहले बीएचयू विश्वनाथ मंदिर पर आदिवासियों साथियों द्वारा जल,जंगल और जमीन से जुड़े नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत की गई।मार्च करते वक्त रास्ते में साथियों ने लोकगीत गाया गया, जिसमें 'सलाई रे...' और 'हिलेला झकझोर दुनिया जनता के आवे पलटनिया' मुख्य रहा।लंका गेट पर 'मुगलसराय रेलवे कर्मचारियों' से प्रतिनिधित्व करने आई महिलाओं द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया गया

दुकानों को बंद कराते वक़्त एवं आक्रोश मार्च में '200 प्वॉइन्ट रोस्टर हेतु अध्यादेश लाओ,हूले हूल!,उलगुलान उलगुलान!,आरक्षण विरोधी यह सरकार नहीं चलेगी!,आर्थिक आधार पर आरक्षण नहीं चलेगा!,13 प्वॉइन्ट   रोस्टर नहीं चलेगा!,200 प्वॉइन्ट रोस्टर लागू करो!,बिरसा मुंडा ने ललकारा!जल,जंगल, जमीन हमारा है!!,जंगल, जमीन हमारी आपकी नहीं किसी के बाप की!,सिध्दू कानो जिन्दाबाद!इत्यादि नारे लगाये जा रहे थे।

सभा को सम्बोधित करते हुए हिन्दी विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ०बिपिन कुमार ने आरक्षण विरोधी 13 प्वॉइन्ट रोस्टर का विरोध किया और कहा कि विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में बैकलॉग की सीटें बिना भरे कोई ओपेन भर्ती न किया जाए।प्रो०चौथीराम यादव ने कहा कि जल,जंगल,जमीन की लड़ाई और 13 प्वॉइन्ट रोस्टर की लड़ाई एक साथ मिलकर लड़ने की जरूरत है।लेकिन यह तानाशाही सरकार हमारे और आपके बीच मतभेद करने के लिए गृह युद्ध कराने की स्थिति उत्पन्न कर दी है।हमे समय और सरकार की रवैये को देखते हुए अपनी लड़ाई आगे बढ़ाने की जरूरत है।शिक्षक संघ के नेता अरविंद सिंह पटेल ने कहा कि सरकार द्वारा 13 प्वॉइन्ट रोस्टर और आर्थिक आधार पर आरक्षण देना,आरक्षण की कॉन्सेप्ट को ही ध्वस्त करने की साजिश है।अफ़लातून देसाई ने कहा कि सरकार द्वारा आदिवासियों की जमीनों को पूंजीपतियों के हाथों में दिया जा रहा है,क्योंकि ये पूंजीपति सरकार में बैठे हुक्मरानों को रुपया देते हैं।अगर आप अपनी लड़ाई इसीप्रकार तेज बनाये रखिये और आचार संहिता घोषित होने के पहले  रोस्टर और आदिवासियों की मुद्दे से सम्बंधित अध्यादेश लागू करवा लेना होगा।

सभा को सुकृति, प्रेमचंद ओराँव, इप्सिता, प्रमोद बांगड़े, रामजनम यादव, विकाश यादव एवं नितेश कुमार रविन्द्र भारती ने सम्बोधित किया और संचालन अनुपम ने किया।सभा का समापन अपनी लड़ाई को जोरदार बनाये रखने के आह्वान के साथ किया गया।

सभा में रणधीर सिंह, मारुति मानव,रत्नेश,प्रवीण नाथ यादव,मृत्युंजय सिंह, सौरभ, बेबी पटेल,हरेन्द्र,सीपी,अवधेश,रणजीत, अजीत,सुशील, नागेंद्र,प्रो०एमपी अहिरवार,हरकेश,प्रो०अजय यादव, सरवन, अरविंद,वियोग सिंह, चंदन चौबे, आशीष, जयलाल, विजेंद्र मीणा, श्यामा, मोहित,बालगोविंद,देवानन्द,नित्यानंद,राजीव, शिवेंद्र, कृष्ण,सुशील यादव, आसीम,प्रभात,सुनील,रामायन,शैलेंद्रसहित हजारों की संख्या में छात्र और सामाजिक न्याय पसन्द लोग शामिल रहे।

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