जीत अकेले ना पाएंगे तो गठबंधन लाए हैं।

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देश सुरक्षित हाथों में है,
जनता को यह भान है।
बहुत दिनों के बाद लगा
फिर जागा हिंदुस्तान है।।

जीत अकेले ना पाएंगे
तो गठबंधन लाए हैं।
दिल्ली की गद्दी खातिर
दुश्मन दुश्मन को भाए हैं।।
अपनी डफ़ली अपना राग है
मुंह विष भरा जबान है।।
बहुत.......

सीय स्वयंवर में फिर से सब
धनुष तोड़ने आये हैं।
साम दाम और दण्ड भेद
हथियार साथ में लाए हैं।
जनता रूपी सीता छलने
साधे तीर कमान हैं।।
बहुत.....

चोर लुटेरे गोल बनाकर
देश लूटने आए हैं।
मुंह में लगा खून है इनके
फिर से चूसने धाए हैं।।
इनको लगता इनकी बपौती
पा लें जब तक जान है।।
बहुत........


-डॉ. आलोक कुमार मिश्र
      स सं वि वि वाराणसी

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