"जहाँ चले दुल्ला रानी वहाँ पड़े पाथर (बर्फ़) पानी" || संदीप मौर्या

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हमारे यहाँ लोक प्रचलित एक कहावत है "जहाँ चले दुल्ला रानी वहाँ पड़े पाथर (बर्फ़) पानी" यानी फूटी किस्मत वाला जहां हाथ लगाएं सत्यनाश हो जाये। ऐसा ही हुआ हमारे इसरो के लैंडर विक्रम के साथ। देश के हमारे वैज्ञानिक लैंडर विक्रम को सफलतापूर्वक चाँद पर लैंड करा रहे थे ।इतने में सदी का महान वैज्ञानिक के आगमन हुआ और निराशा हाथ लगी। यह सदी का महान वैज्ञानिक गटर से गैस बनाता और गैस से चाय बनाकर सबको पिलाता था। यह बड़ा विचित्र वैज्ञानिक है कभी अर्थशास्त्री बनकर नोटबन्दी लागू करता है जिससे देश का सत्यनाश कर बैठता है। भ्रष्टाचार मुक्त भारत बनाने के लिए भ्रष्टाचारी नेताओं को अपनी पार्टी में शामिल करता है। समाज सेवी बनकर में बेटी बचाओ अभियान चलाता है उसके पार्टी के लोग ही... बेटियों के लिए ख़तरा पैदा करने लगे। रोजगार गारंटी देता है सबसे अधिक बेरोजगारी उसके समय में आती है। अरे क्या कहूं नौटंकीबाज है देश का मनोरंजन भी करता है यकीन नहीं डिसकवरी चैंनल देखा कीजिये।हां तो मैं यह कहना चाहता था कि इस वैज्ञानिक के कारण हम भारतीयों को थोड़ी निराशा हाथ लगी और लैंडर विक्रम चाँद पर नही उतर सका। अरे वही ज्योतिष शास्त्र का ज्ञानी है जिसने 2014 में तेल में कीमतों में कमी आने पर कहा था मेरी किस्मत से लोगो का भला हो रहा है आज जब यह घटना हुआ तो यही किस्मत वाला व्यक्ति वहां मौजूद था। मित्रों यह लेख व्यंगात्मक है दिल पे न लें मैं भी राष्ट्रभक्त हूँ ।

लेखक संदीप मौर्य काशी हिन्दू विश्वविद्यालय वाराणसी के छात्र हैं ।



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